हमास के प्रवक्ता हाज़िम क़ासिम ने कहा कि इस्लामी जगत में फूट से अगर सबसे ज़्यादा किसी को फ़ायदा पहुंच रहा है, तो वह ज़ायोनी शासन है, इसीलिए इस्लामी जगत के दो बड़े देशों ईरान और सऊदी अरब के निकट आने से सबसे ज़्यादा इस्राईल को घबराहट है।
11 मार्च को बीजिंग में ईरान और सऊदी अरब ने कूटनीतिक संबंधों की बहाली और रियाज़ और तेहरान में फिर से दूतावासों को खोलने का समझौता किया था।
दोनों देशों के इस समझौते का क्षेत्रीय देशों ने बढ़चढ़कर स्वागत किया और इसके लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियो को टेलीफ़ोन पर मुबारकबाद दी। लेकिन ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने इसे इस्राईल के लिए ख़तरनाक और एक बड़ा झटका क़रार दिया।
हमास का कहना है कि क्षेत्र में मुसलमानों का सिर्फ़ एक ही दुश्मन रहना चाहिए और वह है ज़ायोनी शासन, क्योंकि उसने मुसलमानों की सरज़मीन पर क़ब्ज़ा किया है और वह लगातार मुसलमानों पर अत्याचार कर रहा है। msm
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